प्रश्न:1 धातुओं के दो रासायनिक गुणों को लिखें।
उत्तर-
(i) धातुओं के ऑक्साइड क्षारीय होते हैं।
(ii) अम्लों से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस विस्थापित करते हैं।
2Na+2HCL→ 2NaCl+H2
प्रश्न:2 अधातु के दो गुणधर्मों को लिखें।
उत्तर-
(i) अधिकतर अधातुएँ गैसीय अवस्था में पाई जाती हैं।
(ii) अधातुएँ सोनोरस जैसे ध्वनि उत्पन्न नहीं करते हैं।
प्रश्न:3 कौन-सी धातुएं आसानी से संक्षारित नहीं होती है?
उत्तर- सोना और चाँदी ऐसी धातुएँ हैं जो अभिक्रियाशीलता श्रेणी में सबसे नीचे आती हैं। ये धातुएँ काफी कम अभिक्रियाशील हैं। ऐसी धातुएँ आसानी से संक्षारित नहीं होती हैं।
प्रश्न:4 ऐसा धातु का उदाहरण दीजिए जो –
(i) कमरे के ताप पर द्रव होता है।
(ii) चाकू से आसानी से काटा जा सकता है।
(iii) ऊष्या का सबसे अच्छा चालक होता है।
(iv) ऊष्मा का कुचालक होता है।
उत्तर-
(i) पारद,
(ii) सोडियम तथा पोटाशियम,
(iii) सोना और सिल्वर,
(iv) लेड तथा मरकरी।
प्रश्न:5 (i) कौन-सी धात् हथेली पर रगड़ने पर पिघलने लगती है?
(ii) एक द्रव धातु और एक द्रय अधातु का नाम बतायें।
(iii) किस धातु को किरासन सेल में बुवाकर रखा जाता है?
उत्तर-
(i) गैलियम और सिजियम,
(ii) पारा और ब्रोमीन,
(iii) सोडियम धातु
प्रश्न:6 आघातवध्य तथा उन्य का अर्थ बताइए।
उत्तर- कुछ धातुओं को पीटकर उनके चद्दर बनाए जाते हैं। इस गुणधर्म को आघातवयंता कहते हैं और धातु आघातवऱ्या कहलाती है। किसी धातु के पतले तार खींचे जा सकते हैं। धातुओं के इस गुणधर्म को तन्यता कहते हैं तथा धातु तन्य कहलाती है। एक ग्राम सोने से 2 किमी० लंबा तार बनाया जा सकता है।
प्रश्न:7 लीथियम एवं पोटाशियम के परमाणु द्रव्यमानों का औसत क्या है।
उत्तर – लीथियम का परमाणु द्रव्यमान 6.9 तथा पोटाशियम के परमाणु द्रव्यमान 39.1 है। इनके परमाणु द्रव्यमानों का औसत ( 6.9+39.1 )/2 = 46.0/2 = 23 इन दोनों के परमाणु द्रव्यमानों का औसत सोडियम के परमाणु द्रव्यमान के बराबर है।
प्रश्न:8 आधातवय॑ता से क्या समझते हैं?
उत्तर- कुछ धातुओं को पीटकर चद्दर बनाए जाते हैं। इस गुणधर्म को आघातवर्ध्यता कहते हैं। इसी गुण के कारण एलुमिनियम के चद्दर, लोहे के चद्दर आदि बनाए जाते हैं।
प्रश्न:9 22 कैरेट सोना का क्या अर्थ है?
उत्तर- शुद्ध सोने को 24 कैरेट कहते हैं। यह काफी नर्म होता है। इससे आभूषण बनाना कठिन है। आजकल गहने बनाने के लिए 22 कैरेट सोने की आवश्यकता होती है। 22 कैरेट सोना थोड़ा कठोर होता है। इसमें 22 भाग शुद्ध सोना और 2 भाग ताँबा या चाँदी मिला रहता है।
प्रश्न:10 चाँदी, सोना एवं प्लैटिनम का उपयोग आभूषण बनाने में किया जाता है। क्यों?
उत्तर–सोना एक कोमल, सुनहले रंग का कीमती धातु है। इसका मुख्य उपयोग आभूषण बनाने में होता है। सोने की शुद्धता को कैरेट (Carat) में मापते हैं। शुद्ध सोना 24 कैरेट का होता है। आभूषण बनाते समय शुद्ध सोने में कम कीमती धातु ताँबा या चाँदी थोड़ा मिला दिया जाता है, जिससे वह कुछ कठोर बन जाता है। सोने के बने आभूषण 22 कैरेट के होते हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि इन आभूषणों में 22 भाग सोना 2 भाग ताँबा या चाँदी की मिलावट है। 24 कैरेट सोना को 18 कैरेट सोना में बदलने के लिए 18 भाग सोना में 6 भाग ताँबा या चाँदी मिश्रित कर देते हैं। इस प्रकार चाँदी तथा प्लैटिनम का उपयोग किया जाता है।
प्रश्न:11 ध्वानिक (सोनोरस) किसे कहते हैं?
उत्तर- जब धातुएँ किसी कठोर सतह से टकराती है तो उनसे एक विशेष प्रकार की ध्वनि उत्पन्न होती है। इसे धातुई ध्वनि कहते हैं। इस प्रकार की धातुएँ ध्वानिक कहलाती हैं। स्कूल की घंटी से निकलने वाली ध्वनि इसका उदाहरण है।
प्रश्न:12 बिजली के तार पर पॉलि विनाईल क्लोराइड (P.V.C) अथवा रबर जैसी सामग्री की परत चढ़ी होती है, क्यों?
उत्तर- पॉलिविनाईल अथवा रबड़ विद्युत के अचालक होते हैं। तार पर इसकी परत चढ़ा देने पर खुले तार द्वारा बिजली के झटका से हम बच जाते हैं। ऐसा नहीं करने पर बिजली का तार हमारे लिए खतरा उत्पन्न कर सकती है।
प्रश्न:13 विद्युत के सुचालक अधातु का एक उदाहरण दें। क्या कोई धातु विद्युत का कुचालक है?
उत्तर – विद्युत के सुचालक अधातु ग्रेफाइट है। विद्युत कुचालक धातु लेड है।
प्रश्न:14 दो धातुओं के नाम बताइए जो तनु अम्ल से हाइड्रोजन विस्थापित कर देंगे तथा दो धातुएं जो ऐसा नहीं कर सकती हैं।
उत्तर – सोडियम और पोटाशियम दो ऐसे अभिक्रियाशील धातु है जो तनु अम्ल से हाइड्रोजन विस्थापित करते हैं-
2Na+2HCL→ 2NaCl+H2
2K + H2SO4→K2SO4 +H2
सोना और प्लैटिनम तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया नहीं करती हैं तथा हाइड्रोजन का विस्थापन नहीं करती हैं।
प्रश्न:15 धातुएँ विद्युत सुचालक क्यों होती है।
उत्तर- धातुएँ विद्युत के अच्छे चालक होते हैं। ये विद्युत धनात्मक भी हैं। इसमें इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृति तीव्र होती है। ये ताप और विद्युत के सुचालक होते हैं। इसके तार से होकर विद्युत का प्रवाह आसानी से की जा सकती है। धातुओं की चालकता उनमें उपस्थित सुक्त इलेक्ट्रॉन के कारण होती है। ये इलेक्ट्रॉन धातु से होकर आसानी से दौड़ सकते हैं। यही कारण है कि धातु विद्युत और ताप के अच्छे चालक हैं।
प्रश्न:16 एक धात और एक अधातु का नाम लिखें जो वायु के सम्पर्क में आने पर जल उठते है?
उत्तर- सोडियम धातु वायु के सम्पर्क में आने पर वायुमंडलीय सामान्य ताप पर ही जल उठते हैं। श्वेत फॉस्फोरस अधातु है इसे पानी में डुबाकर रखा जाता है। यह वायु के सम्पर्क में आते ही जल उठता है।
प्रश्न:17 जब धातुएँ नाइट्रिक अमल से अभिक्रिया करती है तो हाइड्रोजन गैस उत्सर्जित नहीं होता है। क्यों?
उत्तर- क्योंकि HNO3 एक प्रबल ऑक्सीकारक है जो उत्पन्न हाइड्रोजन को ऑक्सीकृत करके जल में परिवर्तित कर देता है एवं स्वयं नाइट्रोजन के किसी ऑक्साइड ( N2O, NO, NO2) में अपचयित हो जाता है। लेकिन Mn ही एक ऐसा धातु है जो अति तनु HNO3 के साथ अभिक्रिया कर H2 गैस उत्पन्न करता है।
प्रश्न:18 पोटैशियम तथा सोडियम धातुओं को किरोसीन तेल में डुबाकर क्यों रखा जाता है?
उत्तर-सोडियम तथा पोटैशियम तीव्र अभिक्रियाशील तत्त्व हैं। यह वायुमंडलीय ताप पर ही जल उठता है। अत: इसे खुले वायु में रखने से दुर्घटना की सम्भावना होती है। यही कारण है कि इसे किरोसीन तेल में डुबा कर रखा जाता है जिससे इसकी अभिक्रियाशीलता बिलकुल कम हो जाती है?
प्रश्न:19 द्विधर्मी ऑक्साइड क्या है? उदाहरण दें।
उत्तर- वैसे ऑक्साइड को द्विधर्मी अथवा उभयधर्मी ऑक्साइड कहे जाते हैं जिनमें अम्लीय और क्षारीय दोनों गुण मौजूद होते हैं। जैसे एलुमिनियम ऑक्साइड। ये अम्लों और क्षारों से अभिक्रिया कर भिन्न-भिन्न यौगिकों का निर्माण करता है।
Al2O3+6HCl → 2AICl3 + 3H2O
Al2O3 + 2NaOH → 2NaAIO2 + H2O
प्रश्न:20 एक्वारेजिया से क्या समझते हैं? इसके क्या उपयोग हैं?
उत्तर- एक्वारेजिया 3:1 के अनुपात में सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एवं सांद्र नाइट्रिक अम्ल का ताजा मिश्रण होता है। यह गोल्ड को गला सकता है। जबकि दोनों अम्लों में से प्रत्येक की यह क्षमता नहीं है। एक्वारेजिया भभकता द्रव होने के साथ प्रबल संक्षारक है। यह उन अभिकर्मकों में से एक है जो गोल्ड तथा प्लैटिनम को भी आसानी से गला सकता है।
प्रश्न:21 अभिक्रियाशील धातु को तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में डाला जाता है तो कौन सी गैस निकलती है? आयरन के साथ तनु H2SO4 की रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर-सोडियम एवं पोटैशियम अति अभिक्रियाशील हैं। इस धातु को तनु HCI में डालने पर धातु के क्लोराइड एवं हाइड्रोजन गैस मुक्त होते हैं। अर्थात् धातु अम्ल से हाइड्रोजन गैस को मुक्त करता है।
2K + 2HCI→ 2KCI+H2
2Na+2HCI → 2NaCl+H2
आयरन के साथ तनु सल्फ्यूरिक अम्ल अभिक्रिया कर धातु के सल्फेट और हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करते हैं।
Fe + H2SO4→ FeSO4+ H2
प्रश्न:22 तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ Ca(OH)2, Cu, Na तथा NaOH की अभिक्रियाओं के लिए समीकरण लिखिए।
उत्तर-
Ca(OH)2+ 2HCL → CaCl2 + 2H2O
Cu+2HCl → CuCl2 +H2
2Na+2HCl → NaCl + H2
NaOH + HCL → NaCL + H2O
प्रश्न:23 सोना सांद्र अम्लों में भी नहीं घुलता है। यह किस द्रव में घुलनशील है।
उत्तर – सोना ऐसा धातु है जो सान्द्र अम्लों में भी नहीं घुलता है क्योंकि इसकी अभिक्रियाशीलता अन्य धातुओं की अपेक्षा बहुत कम है। एक्वा रेजिया 3:1 के अनुपात में सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सांद्र नाइट्रिक अम्ल का ताजा मिश्रण है। यह मिश्रण सोना को भी घुला सकता है।
प्रश्न:24 निम्न अभिक्रियाओं के लिए समीकरण दें-
(i) आयरन की तनु सल्फ्यूरिक अम्ल से अभिक्रिया
(ii) पोटैशियम की जल के साथ अभिक्रिया
उत्तर-
(i) आयरन की तनु सल्फ्यूरिक अम्ल से अभिक्रिया से हाइड्रोजन मुक्त होता है।
Fe + H2SO4→ FeSO4+ H2
(ii) पोटैशियम की जल से अभिक्रिया के फलस्वरूप हाइड्रोजन गैस निकलता है।
K+ 2H2O → 2KOH + H2
प्रश्न:25 कारण बताइए-
ऐल्युमिनियम अत्यंत अभिक्रियाशील धातु है, फिर भी इसका उपयोग खाना बनाने वाले बर्तन बनाने के लिए किया जाता है।
उत्तर – ऐल्युमिनियम धातु के सतह पर सामान्य ताप पर ऑक्साइड की परत जम जाती है जो इसको पुनः ऑक्सीकरण से सुरक्षित रखता है। इससे इसकी अभिक्रियाशीलता काफी कम हो जाती है। यही कारण है कि ऐल्युमिनियम अभिक्रियाशील होने के बावजूद इसके बर्तन का उपयोग खाना बनाने वाले बर्तन के रूप में किया जाता है।
प्रश्न:26 कैल्सियम धातु को जल में डालने पर कुछ क्षण बाद जल पर तैरने लगता है क्यों?
उत्तर- Ca धीमी गति से जल से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस के बुलबुले उत्पन्न करता है जो धातु की सतह पर चिपक जाता है। अतः यह जल की सतह पर तैरने लगता है।
प्रश्न:27 तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ ऐलुमिनियम, मैग्नीशियम, जिंक तथा आयरन की अभिक्रियाओं के लिए समीकरण लीजिए।
उत्तर-
2AL+ 6HCL→ 2AICl3 + 3H2
Mg + 2HCI→ MgCl2 + H2
Zn + 2HCI →ZnCl2 + H2
2Fe+6HCL→2FeCl3 + 3 H2
प्रश्न:28 आपने ताँबे के मलीन बरतन को नींबू या इमली के रस से साफ करते अवश्य देखा होगा। यह खट्टे पदार्थ बरतन को साफ करने में क्यों प्रभावी है?
उत्तर – ताँबे का बरतन वायु में उपस्थित कार्बन डाईऑक्साइड के साथ अभिक्रिया करता है जिससे उसकी सतह से भूरे रंग की चमक धीरे-धीरे खत्म हो जाती है और हरे रंग की मलीन परत चढ़ जाती है। नींबू या इमली के रस खुट्टे होते हैं अतः इनमें अम्लीय गुण होता है। कॉपर कार्बोनेट के साथ अम्लीय रस की अभिक्रिया होती है। इससे कॉपर कार्बोनेट की परत अभिक्रिया कर दूर हो जाती है और बरतन साफ चमकीला दिखाई पड़ता है।
प्रश्न:29 (A) संयोजकता से आप क्या समझते हैं?
(B) मैग्नेशियम की संयोजकता लिखें।
उत्तर-
(A) किसी भी तत्त्व की संयोजकता उसके परमाणु के सबसे बाहरी कोश में उपस्थित संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या से निर्धारित हो ती है। मान लिया कि एक तत्त्व Na है। इसकी परमाणु संख्या 11 है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,8,1 है। अतः परमाणु के बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉन संख्या 1 है। अतः इसकी संयोजकता 1 होगी।
(B).मैग्नीशियम का परमाणु क्रमांक 12 है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,8,2 है। इसके बाहरी कोष में 2 इलेक्ट्रॉन है। अत: इसकी संयोजकता 2 है।
प्रश्न:30 आयनिक यौगिकों के गलनांक उच्च क्यों होते हैं?
उत्तर- आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में पाए जाते हैं। इनमें अंतर आण्विक आकर्षण बल काफी मजबूत होते हैं। अतः अंतर आण्विक आकर्षण को तोड़ने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि आयनिक यौगिकों के गलनांक काफी उच्च होते हैं।
प्रश्न:31 खनिज और अयस्क में क्या अन्तर है ।
उत्तर –
खनिज – धातुओं के प्राकृत यौगिक रूप को खनिज कहते हैं । अधिकांश धातुएँ हमें यौगिक के रूप में ही प्राप्त होती हैं जैसे ताँबा हमें पायराइट या क्यूपराइट से प्राप्त होता है ।
अयस्क – जिन पदार्थों ( खनिजों ) से धातु का निष्कर्षण सरल हो उन्हें अयस्क कहते हैं जैसे – ऐलुमिनियम का अयस्क बॉक्साइट है ।
प्रश्न:32 संयोजी इलेक्ट्रॉन क्या है? सोडियम परमाणु में स्थित संयोजी इलेक्ट्रॉन की संख्या लिखें।
उत्तर – किसी भी तत्त्व की संयोजकता उसके परमाणु के सबसे बाहरी कोश में उपस्थित संयोजक इलेक्ट्रॉनों की संख्या से निर्धारित होती है। मान लिया कि एक तत्त्व Na है। इसकी परमाणु संख्या 11 है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,8,1 है। अतः परमाणु के बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉन संख्या 1 है। अत: इसकी संयोजकता 1 होगी।
प्रश्न:33 धातुओं का परिष्करण से क्या तात्पर्य है?
उत्तर – अपचयन प्रक्रम से प्राप्त धातुएँ शुद्ध नहीं होती हैं। इनमें अपद्रव्य होते हैं। शुद्ध धातु की प्राप्ति इन अपद्रव्यों को धातु से हटाकर किया जाता है। अतः अशुद्ध धातुओं से अपद्रव्यों को हटाना धातुओं का परिष्करण कहा जाता है।
प्रश्न:34 एनोड पंक क्या है? उदाहरण के साथ समझावें।
उत्तर – विद्युत शोधन में जब विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तब एनोड पर स्थित अशुद्ध धातु केटायन के रूप में घोल में जाने लगती है। उतनी ही मात्रा में शुद्ध धातु कैथोड पर जमा होती है। घुलनशील अशुद्धियाँ घोल में चली जाती हैं। अघुलनशील अशुद्धियाँ एनोड के नीचे जमा हो जाती हैं। इन्हें एनोड पंक कहते हैं।
प्रश्न:35 किसी M धातु के विद्युत अपघटनी परिष्करण में आप एनोड, कैथोड एवं विद्युत अपघट्य किसे बनाएँगे?
उत्तर- M धातु के सल्फेट लवण (अम्लीयकृत) को अपघट्य बनाया जायेगा। M धातु के अशुद्ध रूप को एनोड और M धातु के शुद्ध रूप को कैथोड बनाया जाता है।
प्रश्न:36 निम्न पदों की परिभाषा दें-
(i) खनिज
(ii) अयस्क
(iii) गैंग
(iv) निस्तापन
(v) भर्जन
उत्तर-
(i) खनिज- भू-पर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले तत्त्वों या यौगिकों को खनिज कहते हैं। ये प्रायः खानों से निकाले जाते हैं।
(ii) अयस्क- वैसे खनिज जिनसे धातु का व्यावसायिक उत्पादन होता है, अयस्क कहलाते हैं। अयस्कों में धातु प्रचुर मात्रा में उपस्थित होते हैं। इससे धातु का उत्पादन सरलता से कम खर्च में होता है।
(iii) गैंग- पृथ्वी से प्राप्त खनिज अयस्कों में मिट्टी, रेत आदि कई अशुद्धियाँ होती हैं। धातुओं के निष्कर्षण से पहले अयस्क से अशुद्धियों को हटाना आवश्यक होता है। ये अशुद्धियाँ गैंग कहे जाते हैं। अयस्कों से गैंग को हटाने के लिए जिन प्रक्रियाओं का उपयोग होता है वे अयस्क एवं गैंग के भौतिक अथवा रासायनिक गुण धर्मों पर आधारित होते हैं। इनके पृथक्करण के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जाता है। कार्बोनेट अयस्क जैसे चूना पत्थर (CaCO3) के निस्तापन से कैल्सियम ऑक्साइड प्राप्त होता है। साथ ही CO2 गैस भी निकलता है।
CaCO2 → CaO+CO2
इस प्रकार जिंक कार्बोनेट के निस्तापन से ZnO और CO2बनता है।
(iv) निस्तापन- अयस्क को उसके द्रवणांक से कम तापक्रम पर तीव्रता से गर्म करने की क्रिया, जिससे उड़नशील अशुद्धियाँ बाहर निकल जाती हैं और ऑक्सीलवण ऑक्साइड में परिणत हो जाता है, निस्तापन कहा जाता है।
(v) भर्जन- अयस्क को वायु की अनियंत्रित आपूर्ति में उसके द्रवणांक से कम तापक्रम पर तीव्रता से गर्म करने की क्रिया भर्जन कहलाती है। इसमें अशुद्धियाँ ऑक्सीकृत होकर बाहर निकल जाती है। जिंक ब्लेंड के भर्जन से जिंक ऑक्साइड बनता है और सल्फर ऑक्सीकृत होकर बाहर निकल जाता है।
2ZnS+3CO2→ 2ZnO + 2SO2
प्रश्न:37 थर्मिट अभिक्रिया के लिए एक संतुलित रासायनिक समीकरण दें। इसका कहाँ उपयोग होता है?
उत्तर –
Fe2O + 2AI → 2Fe + Al2O + ऊष्मा
इस अभिक्रिया का उपयोग रेल की पटरियों को जोड़ने में किया जाता है।
प्रश्न:38 थर्मिट अभिक्रिया क्या है?
उत्तर – आयरन ऑक्साइड ( Fe2O3 ) के साथ ऐलुमिनियम की अभिक्रिया काफी तीव्र होती है और काफी ऊष्मा निकलता है इसका उपयोग रेल की पटरियों को जोड़ने में होता है। इस अभिक्रिया को थर्मिट अभिक्रिया कहते हैं।
प्रश्न:39 अयस्कों के समृद्धीकरण से क्या तात्पर्य है?
उत्तर – पृथ्वी से निकलने वाले अयस्कों में मिट्टी, रेत आदि जैसी कई अशुद्धियाँ पाई जाती हैं। इन अशुद्धियों को हटाना अयस्कों का समृद्धीकरण कहा जाता है।
प्रश्न:40 खनिज पदार्थ एवं अयस्कों के बीच दो अंतरों को लिखें।
उत्तर-
(i) भू-पर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले तत्त्वों या यौगिकों को खनिज कहते हैं लेकिन वैसे खनिज जिनसे धातु का व्यवसायिक उत्पादन होता है, उन्हें अयस्क कहा जाता है।
(ii) हेमेटाइट और आयरन पाइराइट दोनों आयरन के खनिज हैं लेकिन हेमेटाइट अयस्क है।
(ii) खनिज से धातु का निष्कासन सुलाभी ढंग से नहीं किया जा सकता है लेकिन अयस्क से धातु का निष्कासन सुलाभी ढंग से कम खर्च में किया जा सकता है।
प्रश्न:41 गैल्वनीकरण ( यशद लेपन ) किसे कहते हैं ?
उत्तर – लोहे की बनी वस्तुओं को पिघले हुए जिंक में डुबो देने से या विद्युत विधि द्वारा लोहे पर एक बारीक जिंक की परत चढ़ाने की प्रक्रिया गैल्वनीकरण कहलाती है ।
प्रश्न:42 सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर स्थित धातुओं का निष्कर्षण करने के लिए किस विधि का उपयोग किया जाता है?
उत्तर – इस श्रेणी के धातु अत्यंत अभिक्रियाशील होते हैं। अतः गलित या धातु के विलयन का विद्युत अपघटन कर कैथोड पर शुद्ध धातु के रूप में प्राप्त किया जाता है।
प्रश्न:43 ऐनोडीकरण क्या है?
उत्तर – ऐनोडीकरण एलुमिनियम पर मोटी ऑक्साइड की परत बनाने की प्रक्रिया है। वायु के संपर्क में आने पर ऐलुमिनियम पर ऑक्साइड की पतली परत का निर्माण होता है। एलुमिनियम ऑक्साइड की परत इसे संक्षारण से बचाती है। इस परत को मोटा करके इसे संक्षारण से अधिक सुरक्षित किया जा सकता है। एनोडीकरण के लिए एलुमिनियम की एक साफ वस्तु को एनोड बनाकर तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ इसका विद्युत अपघटन किया जाता है। एनोड पर उत्सर्जित ऑक्सीजन गैस एलुमिनियम के साथ अभिक्रिया करके ऑक्साइड की एक मोटी परत बनाती है। इस ऑक्साइड की परत को आसानी से रंग कर एलुमिनियम की आकर्षक वस्तुएँ बनाई जा सकती हैं।
प्रश्न:44 संक्षारण से क्या समझते हैं?
उत्तर- जब धातु सतह जल, वायु अथवा आस-पास के अन्य किसी पदार्थ से प्रभावित होती है, तो इसे धातु का संक्षारित होना कहते हैं तथा इस परिघटना को संक्षारण कहा जाता है। गोल्ड तथा सिल्वर जैसी उत्कृष्ट धातुएँ सुगमतापूर्वक संक्षारित नहीं होती हैं। एलुमिनियम जैसी धातुएँ संक्षारित नहीं होती हैं।
प्रश्न:45 संक्षारण से बचने की तीन विधियों को लिखें।
उत्तर – संक्षारण रोकने की तीन विधियाँ-
(i) यशदलेपन द्वारा,
(ii) विद्युत लेपन द्वारा,
(iii) एनोडीकरण द्वारा।
प्रश्न:46 मिश्रात्वन से क्या समझते हैं? उदाहरण दें।
उत्तर- किसी धातु में अन्य धातु अथवा अधातु की एक निश्चित मात्रा मिलाकर इच्छित गुणधर्म वाली मिश्रधातु प्राप्त की जाती है। इस गुणधर्म को मिश्रात्वन कहा जाता है। पीतल, काँसा, स्टेनलेस स्टील इनके उदाहरण हैं।
प्रश्न:47 एक व्यक्ति प्रत्येक घर में सुनार बनकर जाता है। उसने पुराने एवं मलीन सोने के आभूषणों में पहले जैसी चमक पैदा करने का ढोंग रचाया। कोई संदेह किए बिना ही एक महिला अपने सोने के कंगन उसे देती है जिसे वह एक विशेष विलयन में डाल देता है। कंगन नए की तरह चमकने लगता है, लेकिन उनका वजन अत्यंत कम हो जाता है। वह महिला बहुत दुखी होती है तथा तर्क-वितर्क के पश्चात् उस व्यक्ति को झुकना पड़ता है। एक जासूस की तरह क्या आप उस विलयन की प्रकृति के बारे में बता सकते हैं?
उत्तर — वह विलयन एक्वारेजिया है। यह विलयन सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सांद्र नाइट्रिक अम्ल का 3:1 के अनुपात में बना विलयन है जिसे एक्वारेजिया कहते हैं। इसमें सोना आसानी से घुल जाता है।
प्रश्न:48 ध्वानिक ( सोनोरस ) किसे कहते है ?
उत्तर – जो धातुएँ कठोर सतह से टकराने पर आवाज उत्पन्न करती हैं उन्हें ध्वानिक कहते हैं ।
प्रश्न:49 आघातवर्ध्यता किसे कहते हैं ?
उत्तर – आघातवर्ध्यता ( malleability ) गुण के कारण धातु पर चोट करने पर वे फैलने लगते हैं । इस गुण को आघातवर्ध्यता कहा जाता है ।
प्रश्न:50 ऐसी धातु का उदाहरण दें जो
( i ) कमरे के तापमान पर द्रव होती है ।
( ii ) चाकू से आसानी से काटा जा सकता है ।
( iii ) ऊष्मा की सबसे अच्छी चालक होती है ।
( iv ) ऊष्मा का कुचालक होती है ।
उत्तर-
( i ) पारा ,
( ii ) सोडियम ,
( iii ) चाँदी ,
( iv ) सीसा ( लेड ) ,
प्रश्न:51 आयनिक यौगिकों का गलनांक उच्च क्यों होता ?
उत्तर – अंतर आयनिक आकर्षण के कारण , आयनिक यौगिकों का . गलनांक उच्च होता है ।
प्रश्न:52 दो धातुओं को नाम बताइए जो प्रकृति में स्वतंत्र अवस्था में पाए जाते हैं ।
उत्तर- सोना ( Au ) एवं प्लैटिनम ( Pt ) प्रकृति में स्वतंत्र अवस्था में पाए जाते हैं ।
प्रश्न:53 उभयधर्मी ऑक्साइड क्या होते हैं ? दो उभयधर्मी ऑक्साइडों का उदाहरण दें ।
अथवा ,
उभयधर्मी ऑक्साइड का एक उदाहरण दें ।
उत्तर- जो धातु ऑक्साइड अम्लीय और क्षारीय दोनों प्रकार के व्यवहार प्रकट करते हैं उन्हें उभयधर्मी कहते हैं । उदाहरण- ऐलुमिनियम ऑक्साइड
( AI2O3) , जिंक ऑक्साइड ( ZnO )
प्रश्न:54 क्या होता है जब धातुओं का वायु में दहन होता है ?
उत्तर – जब धातुओं को वायु में दहन किया जाता है तो धातुएँ ऑक्सीजन से संयोग कर ऑक्साइड बना लेते हैं
उदाहरण –
4Na+O2 → 2Na2O ,
2Mg + O2 → 2MgO
प्रश्न:55 क्या होता है , जब धातुएँ जल के साथ अभिक्रिया करती है ।
उत्तर- सभी धातुएँ प्रायः जल के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं । कुछ धातु ठंडे जल के साथ तो कुछ भाप के साथ भी अभिक्रिया करती
प्रश्न:56 गर्म जल का टैंक बनाने में ताँबे का प्रयोग होता है परंतु इस्पात ( लोहे के मिश्र धातु ) का नहीं इसका कारण बताएँ ।
उत्तर – कॉपर , स्टील की अपेक्षा अधिक ताप का सुचालक है । यह स्टील की अपेक्षा अधिक सस्ता भी होता है । ऊर्जा बचाने के लिए गर्म पानी के टैंक को कॉपर से बनाया जाता है । साथ – ही – साथ अधिक गर्मी से जलीय अघुलनशील अशुद्धियाँ स्टील के तली में जमकर फट सकती हैं , ताँबें में नहीं । इससे भयंकर दुर्घटना हो सकती है ।
प्रश्न:57 धातुकर्म क्या है ? इसके विभिन्न चरणों को लिखें ।
उत्तर – किसी अयस्क से धातु शुद्ध रूप में प्राप्त करने की क्रिया को धातुकर्म कहते हैं । इसके विभिन्न चरण इस प्रकार हैं-
( i ) प्रारम्भिक उपचार- ( a ) अयस्क का बारीक चूर्ण बनाना । ( b ) सान्द्रण ।
( ii ) सान्द्रित अयस्क का जारण ।
( iii ) सान्द्रित अयस्क का निस्तापन ।
( iv ) अवकरण ।
( v ) अशुद्ध धातु का शोधन । दो या दो से अधिक धातुओं के समांगी मिश्रण को मिश्र धातु कहते हैं
प्रश्न:58 समीकरण संतुलित करें ।
( i ) Fe2O3 + AI → 3Al2O3 + Fe
( ii ) Na2SO4 + BaCI2 → BaSO4+ NaCl
( iii ) Pb (NO3) → PbO + NO2 + O2
( iv ) Fe + H2O → Fe3O4+ H2
( v ) NaCl + H2O → NaOH + Cl2+H2
उत्तर-
( i ) 3Fe2O3 + 6AI → 3Al2O3+ 6Fe
( ii ) Na2SO4 + BaCI2 → BaSO4+ 2NaCl
( iii ) 2Pb (NO3)2 → 2PbO + 4NO2 + O2
( iv ) 3Fe + 4H2O → Fe3O4+4H2
( v ) 2NaCl + 2H2O → 2NaOH + Cl2+ H2
प्रश्न:59 धातुओं का संक्षारण , गैंग ( अधात्री ) और मिश्र धातु को परिभाषित करें ।
उत्तर – धातुओं का जल एवं वायुमण्डलीय गैसों द्वारा क्षरण संक्षारण कहलाता है , जैसे – लोहे पर जंग लगना । खनिज में प्रायः पत्थर के टुकड़े , मिट्टी के कण , कंकड़ , बालू आदि अशुद्धियाँ मौजूद रहती हैं । इन अपद्रव्यों को आधात्री गैंग या मैट्रिक्स कहते हैं ।
प्रश्न:60 खनिज , अयस्क और गैंग की परिभाषा लिखें ।
उत्तर –
खनिज ( Minerals ) – वे पदार्थ जिनमें मुक्तावस्था या संयुक्तावस्था में पायी जानेवाली धातुओं के साथ कुछ अशुद्धियाँ उपस्थित रहती हैं , खनिज कहलाते हैं ।
अयस्क ( Ore ) – वे खनिज जिनसे आसानी से और कम खर्च में धातु निष्काषित की जा सकती है , अयस्क कहलाते हैं ।
गैंग ( Gangue ) – अयस्क के साथ उपस्थित अशुद्धियों को गैंग कहते हैं ।
प्रश्न:61 लोहे को जंग से बचाने के लिए दो तरीके बताएँ ।
उत्तर – लोहे को जंग से बचाने के दो तरीके इस प्रकार हैं
( i ) तेल या ग्रीस की परत लेपकर – यदि लोहे पर तेल या ग्रीस की तह जमा दें तो नम वायु लोहे के संपर्क में नहीं आ पाती जिससे जंग नहीं लगता । मशीनों के पुों पर ऐसा ही किया जाता है ।
( ii ) एनेमल से- लोहे की सतह पर रंग – रोगन की तह जमाकर जंग पर नियंत्रण पाया जाता है । बसों , कारों , स्कुटर , मोटरसाइकिल , खिड़कियों , रेलगाड़ियों आदि पर एनेमल की तह जमाई जाती है ।
प्रश्न:62 सोडियम को केरोसीन तेल में डुबोकर क्यों रखा जाता है ?
अथवा ,
सोडियम , पोटेशियम एवं लीथियम तेल के अंदर क्यों संग्रहीत किया जाता है ?
उत्तर- सोडियम , पोटेशियम एवं लीथियम सक्रिय धातु हैं जो वायु उपस्थित ऑक्सीजन से क्रिया करके सोडियम ऑक्साइड बनाती हैं । यह पानी से क्रिया कर सोडियम हाइड्रॉक्साइड तथा हाइड्रोजन उत्पन्न करती है । वायु में खुला छोड़ देने पर इसमें आग पकड़ लेती है । इसलिए इसे मिट्टी के तेल में डुबो कर सुरक्षित रखते हैं ।